शुक्रवार, 12 दिसंबर 2008

वक्त नही.

हर खुशी है लोगो के दामन में पर एक हसी के लिए वक्त नही.दिन रात दोड़ती दुनिया में जिंदगी के लिए ही वक्त नही.सारे नाम मोबाईल में है पर दोस्ती के लिए वक्त नही गैरो की क्या बात करे जब अपनों के लिए ही वक्त नही.आंखो में है नींद बरी पर सोने का वक्त नही.पैसो की दोड़ में ऐसी दोड़ की थकने का भी वक्त नही.दिल है गमो से भरा हुआ पर रोने का भी वक्त नही.पराये एहसासों के लिए क़द्र करने जब अपने सपनो के लिए ही वक्त नही.तू ही बता ऐ जिन्दगी इस जिन्दगी का क्या होगा.की हर पल मरने वालो की जीने के लिए भी वक्त नही.
ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ pimp myspace profile