ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ pimp myspace profile

रविवार, 21 दिसम्बर 2008

कभी साया है,कभी धुप मुकद्दर मेरा,

कभी साया है,कभी धुप मुकद्दर मेरा,
होता रहता है यूं ही कर्ज बराबर मेरा।
टूट जाते है कभी मेरे किनारे मुझमे,
डूब जाता है कभी मुझमे समन्दर मेरा।
किसी सेहरा में बिछड़ जायेंगे सब यार मेरे,
किसी जंगल में भटक जाएगा लश्कर मेरा।
बावफा था तो मुझे पूछनेवाले भी न थे,
बेवफा हूं तो हुआ नाम भी घर-घर मेरा।
कितने हंसते हुए मोसम अभी आते लेकिन,
एक ही धुप ने कुम्हला दिया मंजर मेरा।

एक टिप्पणी भेजें

आपका प्रतिक्रिया और सूझाव हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस ब्लाग पर कोई आपतिजनक या कोई खामिया अगर आपको नजर आऐ तो हमे पूर्ण विवरण सहित सूचित करे,मै उसमे सुधार करुंगा या उसे हटा दूंगा।

10 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा ने कहा…

bahut badhiyaa..........

विवेक सिंह ने कहा…

अरे यार बडा अच्छा फोटो लगाया है . हम तो इसी को देखकर भावुक हो गए . अच्छा लिखा !

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत बढिया....फोटो भी सुंदर है।

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर लिख आप ने , आप इस फ़ोटो को पहेली के रुप मे पुछ सकते है, यह फ़ोटो किस का है??
अगर मालुम ना हो तो बताना, वेसे आप को पता तो होगा ही.
धन्यवाद

विनय ने कहा…

बहुत बढ़िया!

pintu ने कहा…

kya bat hai

Parul ने कहा…

bahut khuub

Vidhu ने कहा…

abhi mousam aur aayenge...intjaar kariye badhai

hempandey ने कहा…

जीवन में कभी साया और कभी धूप से गुजरना पड़ता है. इसी का नाम जीवन है.

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुति

एक टिप्पणी भेजें

आपका प्रतिक्रिया और सूझाव हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस ब्लाग पर कोई आपतिजनक या कोई खामिया अगर आपको नजर आऐ तो हमे पूर्ण विवरण सहित सूचित करे,मै उसमे सुधार करुंगा या उसे हटा दूंगा।