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शुक्रवार, 12 दिसंबर 2008

वक्त नही.

हर खुशी है लोगो के दामन में पर एक हसी के लिए वक्त नही.दिन रात दोड़ती दुनिया में जिंदगी के लिए ही वक्त नही.सारे नाम मोबाईल में है पर दोस्ती के लिए वक्त नही गैरो की क्या बात करे जब अपनों के लिए ही वक्त नही.आंखो में है नींद बरी पर सोने का वक्त नही.पैसो की दोड़ में ऐसी दोड़ की थकने का भी वक्त नही.दिल है गमो से भरा हुआ पर रोने का भी वक्त नही.पराये एहसासों के लिए क़द्र करने जब अपने सपनो के लिए ही वक्त नही.तू ही बता ऐ जिन्दगी इस जिन्दगी का क्या होगा.की हर पल मरने वालो की जीने के लिए भी वक्त नही.

मंगलवार, 9 दिसंबर 2008

एक छोटी सी जिंदगी!

जिंदगी बहुत छोटी है और समय जीवन की कसोटी है.फ़िर छोटी सी जिंदगी में बैर-विरोध क्यों?इतना क्रोध क्यों?हमारे पास मुठ्ठी भर वक्त है.अच्छा जिए,प्रेम देकर जिए,प्रेम लेकर जिए.कितने साल जिए-ये महत्वपूर्ण नही है,अपितु किस भावः दशा को लेकर जिए-यह महत्वपूर्ण है.जिंदगी में लंबाई का नही,गहराई का महत्व होता है.दो दिन ही जी.लेकिन सिर का ताज बनकर जी या फ़िर महाराज बनकर जी.आँखों में प्रेम रखकर जी और होठो पर मुस्कान रखकर जी.इस शरीर को बनने में भले ही ९ माह का वक्त लगा हो,लेकिन मिटने में १ मिनिट का भी वक्त नही लगेगा.यह तो मिट्टी का कच्चा घड़ा है.पानी भरते ही बिखर जाएगा.लेकिन आशचर्य है की यहां पल भर का भी भरोसा नही है और आदमी सोचता है की वह नही मरेगा.ऑरों को मरता हुआ रोज देखता है और सोचता है की मै थोड़ी मरनेवाला हूं। मै तो गिननेवाला हूं की ये भी मर गया.
ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ pimp myspace profile