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सोमवार, 19 जनवरी 2009

नल में है जल नही,प्यासी पड़ी टोटियां!

नही है जवानो की अलमस्त टोलियां
न ठट्ठा,न ठिठोली,न मदमस्त बोलियां
'गोलियां'खेल रहे बच्चे अखाडो में
पहलवान खा रहे.ताकत की 'गोलियां'
'अर्थ'के 'अनर्थ' ने यों खेली है गोटियां
नल में है जल नही,प्यासी पड़ी टोटियां
मोबाईल खाइए,और प्रभुगुण गायिए
सस्ते है मोबाईल,महंगी है रोटियां ।।
दुबककर बैठी है बस्ती की गोरियां
तरसते बच्चे है सुनने को लोरियां
जब से बना है पुलिस थाना बस्ती में
बढ़ी है लूटपाट,और बढ़ी है चोरियां।।
नही चाचिया भर छाछ,दही की कटोरियां
न गरम-गरम पुरियां,न खस्ता कचोरियां
पण पराग खायी और भूल जायिए,
कभी यहां सजती थी पान की गिलोरियां।।
नदियों को लील गयी सीमेंट की बोरियां
कंक्रीट में दब गयी नेह-बंध डोरियां
नही बरगद का ठांव,नही पीपल की छांव
नही सुघर सजे पाँव,न गांव है,न गोरियां।।

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2008

वक्त नही.

हर खुशी है लोगो के दामन में पर एक हसी के लिए वक्त नही.दिन रात दोड़ती दुनिया में जिंदगी के लिए ही वक्त नही.सारे नाम मोबाईल में है पर दोस्ती के लिए वक्त नही गैरो की क्या बात करे जब अपनों के लिए ही वक्त नही.आंखो में है नींद बरी पर सोने का वक्त नही.पैसो की दोड़ में ऐसी दोड़ की थकने का भी वक्त नही.दिल है गमो से भरा हुआ पर रोने का भी वक्त नही.पराये एहसासों के लिए क़द्र करने जब अपने सपनो के लिए ही वक्त नही.तू ही बता ऐ जिन्दगी इस जिन्दगी का क्या होगा.की हर पल मरने वालो की जीने के लिए भी वक्त नही.

मंगलवार, 9 दिसंबर 2008

एक छोटी सी जिंदगी!

जिंदगी बहुत छोटी है और समय जीवन की कसोटी है.फ़िर छोटी सी जिंदगी में बैर-विरोध क्यों?इतना क्रोध क्यों?हमारे पास मुठ्ठी भर वक्त है.अच्छा जिए,प्रेम देकर जिए,प्रेम लेकर जिए.कितने साल जिए-ये महत्वपूर्ण नही है,अपितु किस भावः दशा को लेकर जिए-यह महत्वपूर्ण है.जिंदगी में लंबाई का नही,गहराई का महत्व होता है.दो दिन ही जी.लेकिन सिर का ताज बनकर जी या फ़िर महाराज बनकर जी.आँखों में प्रेम रखकर जी और होठो पर मुस्कान रखकर जी.इस शरीर को बनने में भले ही ९ माह का वक्त लगा हो,लेकिन मिटने में १ मिनिट का भी वक्त नही लगेगा.यह तो मिट्टी का कच्चा घड़ा है.पानी भरते ही बिखर जाएगा.लेकिन आशचर्य है की यहां पल भर का भी भरोसा नही है और आदमी सोचता है की वह नही मरेगा.ऑरों को मरता हुआ रोज देखता है और सोचता है की मै थोड़ी मरनेवाला हूं। मै तो गिननेवाला हूं की ये भी मर गया.

बुधवार, 12 नवंबर 2008

तिमिर का विनाश!

पीपल की डाली पर उतरी है शाम,कर रही दिशाए अब प्रणाम,दिन भर की थकी अभी लोटी है नाव,पर्वत पर डाल रही रश्मिया पड़ाव,सूरज ने किरणों को फेक दी लगाम,पीपल की डाली पर उतरी है शाम!टूटे प्रतिबिम्ब कुछ समेट रही झील,दिनकर की कैमरे की ख़त्म हुयी रील,'दीपक'संग करेगी,रात भर मुकाम,पीपल की डाली पर उतरी है शाम!आतंक-अंधियारा कर रहा विनाश,फी भी है जीवंत 'दीप'का प्रकाश,अंधियारा हो गया,स्वंय बदनाम,पीपल की डाली पर उतरी है शाम!सूरज उगाने का करे सब प्रयास,सहज संभव है करना तिमिर का विनाश,सूरज को किरणों की,सोंप दो लगाम,फ़िर पीपल की डाली पर न उतरेगी शाम! "एक शेयर कहना चाहता हूं" पानी में पत्थर मत मारो, इसे कोई और भी पीता है, यूं उदास न रहो आप, क्योंकि आप को देख कर कोई और भी जीता है!

मंगलवार, 28 अक्टूबर 2008

हर दिन, हर सुबह एक नया जीवन है,

हर दिन,हर सुबह एक नया जीवन है,इसलिए नए जीवन की शुरुआत पुराने मन से मत करो,नए जीवन के साथ मन भी नया होना चाहिए.हो सकता है रातभर में तुम्हारा दुसमन मित्र बन गया हो और मित्र दुसमन.इसलिए जब सुबह किसी से मिलो तो एकदम अजनबी की तरह मिलो.कोई अपनी पूर्व-धारणा लेकर मत मिलो और सुबह प्रभु से प्राथना में कहो,प्रभु!मै इस दिन के लिए आपका आभार व्यक्त करता हूँ की आज के दिन कोई कितना भी भारकाए,मै शांत रहूँगा एवं आग का जबाब पानी से दूंगा!अगर आप लोग हमारी इस बात से सहमत है.तो फ़िर आईये हम सब मिलकर ये संकल्प ले और पूर्व की धारणाओं-विचारों और पुरानी गिले-शिकवे को दीपावली के इस महापर्व की ज्योत में जलाकर एक नई सुबह एक नया जीवन की शुरुआत करे!आपको एवं आपके सहपरिवार को दीपावली की शुभकामनाये!
ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ pimp myspace profile