गुरुवार, 15 जनवरी 2009

मेरा हाथ...और मेरा इश्वर!


एक महिला बहुत गरीब थी.उसके पति ने भी उसे छोड़ दिया था।

आजीविका का कोई सहारा उसके पास नही दीखता था,


जब उसका मुकद्दमा अदालत में चला गया तो जज ने पूछा,


''श्रीमती जी ,क्या आपके पास गुजरे का कोई साधन है?


"श्रीमान!सच्च पूछिए तो मेरे पास तीन है"


"तीन!"जी हां ,एक-दो नही तीन!


"वे कोन-कोन से?


"मेरे हाथ,मेरी अच्छी सेहत और मेरा इश्वर


हमारा ईश्वर हमारा शरण और शक्ति है,


मुसीबत में बढ़ कर मददगार नही।


7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर बात,
    धन्यवाद.

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  2. पिंटू जो चीज तुम चाहते थे मेने तुम्हारे ब्लांग मै डाल दी है,
    ्ध्यान से देखो ओर इस का नाम भी बदल लो

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  3. खुद्दारी इसे कहते हैं और ख़ुद पर भरोसा.....बहुत अच्छा लगा इसे पढ़ना

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  4. ऐसी बातें लिखा करो पढ़कर अच्छा लगता है, वह गाँधी वाला लेख भी अच्छा है!

    ---मेरा पृष्ठ
    चाँद, बादल और शाम

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  5. ईश्वर की कृपा बनी रहे तो अच्छी सेहत से मनुष्य अपने (हाथों के) भरोसे असंभव को भी सम्भव में बदल सकता है

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ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ pimp myspace profile