ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ pimp myspace profile

सोमवार, 12 जनवरी 2009

इस बहाने से देख ली दुनिया हमने!

जुस्तजू जिसकी थी उसको तो न पाया हमने,
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने।
सबका अहवास वही है जो हमारा है आज,
ये अलग बात है की शिकवा किया तन्हा हमने।
ख़ुद पशेमान हुए ने उसे शर्मिंदा किया,
इश्क की वजह को क्या खूब निभाया हमने।
कोन सा कहर ये आंखो पे हुआ है नाजिम,
एक मुद्दत से कोई ख्वाब न देखा हमने।
उम्र भर सच ही कहा सच के सिवा कुछ न कहा,
अज्र क्या इसका मिलेगा ये न कभी सोचा हमने।

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5 टिप्पणियाँ:

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर लगी यह मीना कुमारी की गजल, आप का धन्यवाद फ़िर से इसे याद दिलाने के लिये

विनय ने कहा…

मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
मेरे तकनीकि ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं

-----नयी प्रविष्टि
आपके ब्लॉग का अपना SMS चैनल बनायें
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

Dev ने कहा…

आपको लोहडी और मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ....

muskan ने कहा…

कोन सा कहर ये आंखो पे हुआ है नाजिम,
एक मुद्दत से कोई ख्वाब न देखा हमने।

bahut sundar gazal hai.

महेन ने कहा…

दोस्त रचनाकार इतना तो हक़ रखता है कि उसकी रचना का इस्तेमाल करो तो उसका नाम भी साथ में दे दो.

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