ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ pimp myspace profile

रविवार, 4 जनवरी 2009

तीन सहेलिया!

किसी गांव में तीन सहेलिया रहती थी.

विद्दा, दोलत और इज्जत

तीनो में बहुत घनिष्ठ मित्रता थी.एक दिन जब विदाई का समय आया तो विद्दा बोली-मै जा रही हूं.मुझसे मिलना हो तो मै किताबो में तथा विद्दानो के पास मिलूंगी.दोलत बोली-मै अमीरों के पास मिलूंगी.इसके बाद इज्जत की बारी आई तो वह कुछ न बोली.तो विद्दा और दोलत ने पूछा-तुम कही नही जा रही हो?तब इज्जत बोली-मै एक बार चली गई तो फ़िर वापस नही मिलूंगी।

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10 टिप्पणियाँ:

मोहन वशिष्‍ठ ने कहा…

बिल्‍कुल सच्‍ची बात है दौलत जाने के बाद वापस आ जाएगी लेकिन अगर इज्‍जत चली गई तो फिर नहीं आने की बिल्‍कुल सही लिखा है

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत ही अच्छी बात, सच है एक बार इज्जत चली गई तो कभी वापिस नही आती.

सुनील मंथन शर्मा ने कहा…

behtrin. bhadhai.

Mired Mirage ने कहा…

यह तो कुछ ही शब्दों में बहुत बड़ी बात कह दी आपने !
घुघूती बासूती

विवेक सिंह ने कहा…

रोचक रूप में अच्छी शिक्षाप्रद बात कह गए पिण्टू जी ! बधाई !

vinay ने कहा…

pinto bahi aaj kal to ijjat bhrasht logo ki hai, sedhey sadey logo ki khan, par haan ek bar chali gayi to laut ke nahin aayegi.

रश्मि प्रभा ने कहा…

शानदार.......

Udan Tashtari ने कहा…

बिल्कुल सही सीख!! आभार.

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

बहुत सुंदर तरीके से आपने गहरी बात कही है

विनय ने कहा…

बहुत ढ़ग से ज्ञानियों वाली बात की आपने

बहुत ख़ूब...

---मेरा पृष्ठ
चाँद, बादल और शाम

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