बस यहां इंसान को इंसान होना चाहिए।
आदमी-आदमी का भी सम्मान होना चाहिए,
जिन्दगी को प्यार का उनवान होना चाहिए!
नेता-फरिस्ता-देवता,भग्वान और अवतार क्यों?
बस यहां इंसान को इंसान होना चाहिए!
क्या यही बस जरूरते है-रोटियां-कपड़े-मकां,
साथ में होठो पे भी मुस्कान होना चाहिए!
कोई पहले,कोई आखिर-सब मरेंगे-सच यही,
पर बिच में तो जीने का सम्मान होना चाहिए!
बारूद के इस गांव में जीने की बस एक राह है,
अब मोहब्बत का भी रास्ता आसन होना चाहिए!
बस यह इंसान को इंसान होना चाहिए!
