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शनिवार, 13 दिसंबर 2008

हम देश है राधा-किशन के,प्रेम ही पैगाम है!

हम देश है राध-किशन के, प्रेम ही पैगाम है,

फ़िर जो दुश्मन न माने,जंग ही अंजाम है!

  • दोस्तों,हमारे प्यारे मुल्क पर
    पड़ोसी एक के बाद एक आतंकवाद
    के हमले करा रहा है,
    जबकि वह ख़ुद आतंकियों के
    पाप का बोझ उठा रहा है.
    उसके भी हजारो मासूम
    आतंक की आग में जल गये!
    बारूद के शोलो में उनके
    भी अमनो-चैन पिघल गये,
    फ़िर भी नही आ रही है उसे समझ!
    बेकार में वह दहशत के
    जाल में गया है उलझ!
    अरे यह टेरेरिज्म सिर्फ़ वन-वे होता है,
    जो जाता है लोट नही पाता,
    वजूद अपना खोता है.
    और दोस्तों किसने कहा
    की आतंक दीनो-ईमान है?
    हर धरम बस यही कहता है
    की मुहब्बत ही उसका पैगाम है.
    इस दुनिया में जिंदगानी है चार दिन,
    तो क्यों नफरतों में गंवा दे इसे,
    आते नही है इश्क
    के बार-बार दिन!
    हमारी तो दोस्तों राय है यही!
    जो बात हमारे फकीरों-संतो ने है
    कही-यह दुनिया फानी है,
    आनी-जानी है,
    जो जिन्दगी मिली है,
    उसमे गुलो को छांट लो,
    प्यार की खुशबू है जो
    उसे आपस में बांट लो!
    एक शेर दोस्तों पेश है
    बक्शी है उसने जिन्दगी,
    तो इसे कुछ नाम दे,
    इश्क बन्दा,इश्क रब है,
    इसे इश्क का ही काम दे!
    आज भी खतरे है मुल्क को
    अन्दर-बाहर बेहिसाब!
    ये हमले होते क्यों है?
    यह भी हमें जानना होगा की
    हम लापरवाह हो सोते है क्यों?
    अंत में माहोल बदलने
    के लिए यह शेर पढ़े:
    आज सीमा पर
    हमारे जंग का आसार है,
    मगर पहले उन्हें पकडो,
    जो देश के गद्दार है!

रविवार, 26 अक्टूबर 2008

अत्याधुनिकता ने परिवेश को कलुषित किया है

बदलते परिवेश में आज की अधिकांश लड़कियों में अनैतिकता व अनुशासन्हीनता भी अपर्त्याशित रूप से पनपी है। फिल्मो व पाश्चत्य संस्कृति के परिपेछ्य में हर लडकी स्वंय को मार्दन समझने लगी है नई उपज की नई पौध ये लड़कियों पहनने, ओड़ने का सलीका, बातचीत की तहजीब व आदरभाव जैसे आदर्श मनको को त्यागकर मुंहफट,गैलिहाजी व दिग्भ्रमित हो चली है उनकी शक्तियों का सार्थक मापदंड निश्चित नही हो पाया है। दरअसल आज लड़कियों में अत्याधुनिकता व व्यापक सोंच की स्वतंत्रता तो बढ़ी है, लेकिन यह सब जागरूक व संवेदनशील नारी की असीमता के सर्वथा खिलाफ है। भारतिय सांस्कृतिक परिवेश में जीते हुए पाश्चात्य की नक़ल सरासर बेमानी व मानसिक दिवालियपन की परिचायक है।चंद अपवादों को छोरकर अमूमन हर लडकी स्वंय को किसी फिल्मी नायिका से कम नही समझती है। घर के आँगन से स्कूल, कॉलेज कैम्पस तक सवर्त्र ही अयाधुनिकता का एक पर्तिस्पर्धात्मक नाजारा देखने व सुनने को मिलता है, प्रत्येक लडकी फैशन का खूबसूरत जामा पहनकर स्वंय को श्रेष्ठ साबित करने हेतु उत्सुक व प्रयास्त है। नैतिक मूल्यों की धज्जिया उडातीये लडकिया भावनाओं के धरातल पर भी संवेदन शून्य हो चली है। आज हर लडकी दोरा यह सोंचा जाना आवश्यक है वह अपने परिबार व समाज के परती आख़िर कहां तक चिंतितसमपिर्त नजर आती है नि:संदेह नतीजा सिफर ही निकलेगा येसी विसंगति व त्रासदायी परिस्थितियों के फल स्वरूप ही चुनोतियों व संघर्षो के बिच फासले आज बद गये है, इन सबके लिए आख़िर कोन जिम्मेदार व कसूरवार है? लडकी के माता-पिता, उनके गुरु, आधुनिक परिवेश या फ़िर स्वंय लडकिया? जहाँ तक माता-पिता का सवाल है 'कहना उनका फर्ज है और जीना मेरी स्वतंत्रा बेटियाँ यही सोंचकर अपने माता-पिता के कसावट भरे संस्कारों को निष्प्रभावी व निर्थक सिद्ध कर रही है; उधर गुरु व शिष्या के बिच आदरभाव व शालीनता का तारतम्य टूट चुका है। लडकियाँ प्रसंगवश अपने गुरु का मखोल उडाती नजर आती है। अत्याधुनिक लड़कियों ने सारे माहोल को ही सराकर रख दिया है, इस कड़वी सचाई को आज हर लडकी द्रोरा सहज ही स्वीकारना होगा?
ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ ॐ भूर्भुवः स्वः । तत् सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि । धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ pimp myspace profile