अक्से-यादे-यार को धुंधला किया है,मैंने ख़ुद को जानकर तन्हा किया है।
भूल कर तुझको पशेमा हूँ बहुत मै,
लोग कहते है बहुत अच्छा किया है।
दिन ढले और शाम का दीदार हो फ़िर,
काम दिन भर इसलिए इतना किया है।
जितनी शम्मे है हवा को सोंप दूँ फ़िर,
कोन पूछेगा की क्यों एसा किया है।
शहर ये आबाद था शाहिद हूँ मै भी,
किस की वहशत ने इसे सहरा किया है।
